“मेरी अनुभूति”
गलत था मैं,जो प्रताड़ित करता रहता था,चिल्लाता था, गुर्राता था,असमंजस में पड़ा रहता था। फिर यकायक एक अनुभूति हुई—पता चला कि उसके पापा की मां,जो बाबू की दादी है,किसी वैज्ञानिक से कम नहीं। उसने उसके छोटे चाचा कोयही ढर्रा अपनाकर बिगाड़ा था,लाड़-प्यार में पाला था।आज वही चाचा,बड़े-बड़े इंजीनियरों का बेड़ा गर्क कर रहे हैं।अब वो…