“मौका”
मिले राह, मंजिल पा लूंगा,
मिले आस, विश्वास जगा लूंगा।
मिले मौत, तौबा कर लूंगा,
अभी नहीं, ऐसा कह दूंगा।
मिले सुअवसर, सब कर लूंगा,
जीवन भी अर्पण कर दूंगा।
नहीं शिकायत, कभी करूंगा,
लब को मैं अपने सी लूंगा।
कठिन हो राह, मंजिल हो मुश्किल,
फिर भी मैं तत्पर हो लूंगा।
बन कर चुरुंगुन, तिनके चुनकर,
आंधी में भी अडिग रहूंगा।
हर कोशिश हो विफल भी तो क्या,
अपना आशियाना बना ही लूंगा।
– महेंद्रकुमार सिंह
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