गलत था मैं,
जो प्रताड़ित करता रहता था,
चिल्लाता था, गुर्राता था,
असमंजस में पड़ा रहता था।
फिर यकायक एक अनुभूति हुई—
पता चला कि उसके पापा की मां,
जो बाबू की दादी है,
किसी वैज्ञानिक से कम नहीं।
उसने उसके छोटे चाचा को
यही ढर्रा अपनाकर बिगाड़ा था,
लाड़-प्यार में पाला था।
आज वही चाचा,
बड़े-बड़े इंजीनियरों का बेड़ा गर्क कर रहे हैं।
अब वो कनाडाई हैं,
कमाई बढ़िया चल रही है।
किसी को बेमतलब मत जांचो,
अनावश्यक विचार मत पालो।
समय के गर्त में
बड़ों-बड़ों का बेड़ा गर्क हो जाता है,
और कुछ के भाव चढ़ जाते हैं,
बाजार चल पड़ते हैं।
न्याय और विचार,
निर्णय और न्याय,
ये सब अलग-अलग ध्रुव हैं,
इन्हें एक साथ मत जोड़ो।
लोया न्याय देने वाला था,
पर निर्णय किसी और ने किया,
विचार जिसने किया,
अंजाम भी उसी ने दिया,
पर न्याय अधूरा ही रह गया।
सारे मुख्यमंत्री दौड़ते रहते हैं
प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में,
मंत्री अपनी हसरतें पालते रहते हैं,
कोई भी जुगाड़ लगाने में
ज़रा भी कोताही नहीं बरतता,
पर अंत में,
सिर्फ एक ही प्रधानमंत्री बनता है।
हंसो,
पर ऐसा कि किसी को पीड़ा न हो।
हंसो, खुलकर हंसो,
पर फंसो मत।
अगर हंसना ही है,
तो महबूब, असरानी और जॉनी लीवर बनकर हंसो, हंसाओ।
पर कभी भी द्रौपदी बनकर मत हंसना,
वरना महाभारत की रचना हो जाएगी।
मुझे तो सारी औरतें द्रौपदी लगती हैं,
और हर घर में एक सीता दिखती है।
अगर पढ़ सको तो पढ़ लो—
हर घर में रामायण और महाभारत के काव्य
बिखरे पड़े हैं।
- महेंद्रकुमार सिंह
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“My Realization”
I was wrong,
Tormenting, shouting,
Growling,
Lost in my own frustrations.
Then, suddenly, a realization dawned—
I discovered that his father’s mother,
Who is little Babu’s grandmother,
Is no less than a scientist.
She had spoiled his younger uncle
In just the same way,
Raising him with boundless affection.
And now, that very uncle
Is ruining the careers of great engineers.
Today, he is a Canadian,
Earning a hefty fortune.
Don’t judge anyone without reason,
Don’t nurture unnecessary thoughts.
In the depths of time,
Even the greatest sink,
While some rise,
And the marketplace shifts.
Justice and Thought,
Decision and Justice—
These are all different things,
Do not mix them together.
Loya was meant to deliver justice,
But someone else made the decision.
The one who pondered
Was the one who executed it.
Yet, justice remained incomplete.
All Chief Ministers race,
Always chasing the Prime Minister’s seat.
Ministers nurture their dreams,
Leaving no stone unturned in their schemes.
But in the end,
Only one becomes the Prime Minister.
Laugh,
But let no one be hurt by your laughter.
Laugh, laugh freely,
But do not get trapped.
If you must laugh,
Then laugh like Mehmood, Asrani, or Johnny Lever,
Spread joy.
But never laugh like Draupadi—
Or a new Mahabharata shall be written.
To me, all women seem like Draupadi,
And every home holds a Sita.
If you can read between the lines, then do—
Ramayana and Mahabharata’s verses
Are scattered in every household.
-Mahendrakumar Singh
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