“असली हरामज़ादे”
अमेरिकी—कभी असली ब्रिटिश थे,
अब बस लूट और खून के वारिस।
बर्बर, निर्दयी, बेलगाम,
वियतनाम, अफगानिस्तान, इराक—
हर जगह सिर्फ राख छोड़ी।
उन्होंने मूल अमेरिकियों का संहार किया,
उन्हें उनकी ही धरती से मिटा दिया।
अब उनकी आवाज़ बस गूंजती है,
इतनी धीमी कि हक़ भी न मांग सकें।
आज अमेरिका यूक्रेन की आग भड़का रहा है,
नेटो के खेल का नया मोहरा बना रहा है।
ब्रिटेन, यूरोप, पूरा पश्चिम एकजुट—
शांति के लिए नहीं, रूस को तोड़ने के लिए।
लालच ने रचा एक नया साम्राज्य—
संयुक्त राज्य इज़राइल।
और इसकी नींव पर जल गया फिलिस्तीन,
लोग मिटा दिए गए, ज़मीन निगल ली गई।
ग़ज़ा की दहशत अब बदल चुकी है,
पश्चिमी सभ्यता का नया चेहरा बन चुकी है।
तो अब बताओ—
असली हरामज़ादे कौन हैं?
ब्रिटिश?
अमेरिकी?
इज़राइली?
या यूरोपीय?
– महेंद्रकुमार सिंह
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